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लोग मुझे अपने होंठों से लगाए हुए हैं,

  लोग मुझे अपने होंठों से लगाए हुए हैं , मेरी शोहरत किसी के            नाम की मोहताज नहीं Attitude Shayari, log mujhe apane honthon  se lagae hue hain,  meree shoharat kisee ke  naam kee mohataaj nahin

मुझे नींद की इजाज़त भी उसकी

 

मुझे नींद की इजाज़त भी उसकी

      यादों से लेनी पड़ती है,

     जो खुद तो सो जाता है,

     मुझे करवटों में छोड़ कर......!!!

https://shayariek.blogspot.com/2020/09/dard - shayari.html

dard - shayari


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लोग मुझे अपने होंठों से लगाए हुए हैं,

  लोग मुझे अपने होंठों से लगाए हुए हैं , मेरी शोहरत किसी के            नाम की मोहताज नहीं Attitude Shayari, log mujhe apane honthon  se lagae hue hain,  meree shoharat kisee ke  naam kee mohataaj nahin

"vakt ke saath rishte naye jodate rahiye, dosti shayari,

मीर तक़ी मीर (Mir Taqi Mir) भारतीय उर्दू कवि थे और उन्हें उर्दू शायरी के महान कवियों में से एक माना  जाता है। वे 18वीं सदी के अंत में और 19वीं सदी की शुरुआत में जन्मे और उनका जन्म स्थान दिल्ली में था। मीर तक़ी मीर का जीवन बहुत ही रोमांचक और कविता से भरपूर था। उन्होंने अपने काव्य में जीवन के रंग-रूप और भावनाओं को बखूबी व्यक्त किया। उनकी कविताएँ आम लोगों के दिलों को छूने वाली थीं और वे आधुनिक उर्दू शायरी के प्रमुख प्रतिनिधित्व में हैं। मीर तक़ी मीर की जीवनी में कुछ मुख्य तथ्य हैं: शायरी की शुरुआत: मीर तक़ी मीर ने अपनी शायरी करियर की शुरुआत नवाब आसफ़ उद्दौला के दरबार में कियी थी, जो दिल्ली के उस समय के मशहूर शायरों के आस-पास हुआ करते थे। आर्थिक कठिनाइयाँ: मीर का जीवन आर्थिक कठिनाइयों से भरपूर रहा है। उन्होंने कई बार गरीबी और आर्थिक संकट का सामना किया और इसका प्रतिबिम्ब उनकी कविताओं में मिलता है। व्यक्तिगत जीवन: मीर तक़ी मीर का व्यक्तिगत जीवन भी दुखभरा रहा है। उनकी प्रेम कविताओं में अकेलेपन, प्यार, और दर्द के बारे में बड़े ही आदर्श ढंग से व्यक्त किया गया है। उर्दू शायरी में योगदान: मीर...

अच्छा सोचिए अच्छा बोलिए

     अच्छा सोचिए अच्छा बोलिए और            अच्छा कीजिए क्योंकि              सब आपके पास लौटकर आता है                              Good morning